MGNREGA Yojana 2022: बेरोजगारी के बीच सरकार ने बजट में 73000 करोड़ रुपये लगाए, योजना को बनाया जाएगा सख्त

MGNREGA Yojana 2022: वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने बुधवार को समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी MGNREGA Yojana 2022 के लिए आवंटन में कटौती नहीं की है।

इसके साथ ही, उन्होंने ऐसी मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिसमे सोमनाथन जी ने कहा, “अगर मनरेगा योजना 2022 के मनरेगा योजना 2022 बजट आवंटन को लेकर केंद्रीय बजट 2021-22 और केंद्रीय बजट 2022-23 की तुलना करते हैं तो हमने मनरेगा के लिए 73000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

अनुपूरक आवंटन में, हमने वित्तीय वर्ष 2021-22 के संशोधित अनुमानों में महामारी और राज्यों द्वारा मांग के कारण 98,000 करोड़ रुपये तक इस मनरेगा योजना 2022 मे बढ़ा दिया था।”

बढ़ गया है MGNREGA Yojana 2022 बजट अनुमान

अधिकारी ने बताया कि इस MGNREGA Yojana 2022 में लाभार्थियों के नाम दर्ज करने के लिए बिचौलिये पैसे ले रहे हैं। बिना पैसे दिए लोगों को काम नहीं मिल रहा है। कई बार किसी अन्य के नाम पर बिचौलिये पैसे हड़प लेते हैं।

इससे दो साल में मनरेगा योजना 2022 के बजट अनुमान के मुकाबले संशोधित अनुमान काफी अधिक रहा है। इस दौरान मनरेगा योजना 2022 में काफी गड़बड़ियां देखी गई हैं।

MGNREGA Yojana 2022 में हो रही है इस तरह गड़बड़ी

आपको बता दें कि पिछले दो सालों में इस मनरेगा योजना 2022 का गलत इस्तेमाल की जानकारी सरकार को मिली है। इस बात की जानकारी एक शीर्ष अधिकारी ने दी है।

अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से बात करते हुए बताया है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से भ्रष्टाचार पर बहुत हद तक लगाम लगी है लेकिन, पिछले कुछ समय से यह मामले भी सामने आ रहे है जिसमें पता चला है कि कुछ बिचौलिए लोगों के नाम मनरेगा योजना 2022 की सूची में डालकर उनके अकाउंट में आए पैसों में अपना पैसा ले लेते है।

बेरोजगारी भत्ते पर सवाल

समिति के मुताबिक मनरेगा योजना 2022 की धारा 7(1) के माध्यम से और निर्देशित बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान का घोर उल्लंघन किया जा रहा है। MGNREGA Yojana 2022 परिकल्पना की गई है यदि मनरेगा योजना 2022 के तहत रोजगार के लिए आवेदन करने वाले किसी आवेदक को 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता तो वह दैनिक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा।

ये भत्ता वित्तीय वर्ष के दौरान पहले 30 दिनों के लिए मजदूरी दर के एक चौथाई से कम नहीं होगा। वहीं, वित्तीय वर्ष की अवधि के लिए मजदूरी दर के आधे से भी कम नहीं होगा। मनरेगा योजना 2022 के साथ ही देशभर में मजदूरी दर को एक समान करने की भी सिफारिश हुई है।

समिति ने बताया कि मनरेगा योजना 2022 के पहलुओं की निगरानी करने की सिफारिश इसलिए भी की गई है कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार गारंटी से जुड़े इस मनरेगा योजना 2022 के महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आधार पर ये योजनाएं अधूरी न रह जाए या उसमें विलंब न हो।

MGNREGA Yojana 2022 के लिए 73,000 करोड़ रुपये आवंटित

सोमनाथन ने कहा, “2022-23 के लिए हमने 73,000 करोड़ रुपये की समान राशि मनरेगा योजना 2022 के लिए आवंटित की है क्योंकि हम मानते हैं कि इस बार स्थिति इतनी खराब नहीं दिख रही है, जितनी हमने अप्रैल-मई 2021 में देखी है।

लेकिन, अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है और मनरेगा योजना 2022 का आवंटन बढ़ाने की मांग होती है तो हम संशोधित अनुमान में आवंटन बढ़ा सकते हैं।” बता दें कि मनरेगा योजना 2022 एक मांग-संचालित योजना है, जो किसी भी ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के अकुशल काम की गारंटी देती है, जो इसे चाहता है।

योजना मे मिलता है 100 दिन का रोजगार

मनमोहन सरकार के समय वर्ष 2006 में इस मनरेगा योजना 2022 को लाया गया था। इस मनरेगा योजना 2022 के तहत सरकार ग्रामीण इलाकों में लोगों को 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देती है। बाद में मोदी सरकार के आने के बाद भी इस मनरेगा योजना 2022 को बरकरार रखा गया।

अध्ययन दिखाते हैं कि ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी की समस्या को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने में इस मनरेगा योजना 2022 का अहम योगदान रहा है। फॉर्च्यून इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को अगर मनरेगा के मौजूदा लाभार्थियों को ही 100 दिन का रोजगार देना है तो उसे बजट में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का आवंटन करना चाहिए था।

हर साल मनरेगा योजना 2022 के बजट का एक बड़ा हिस्सा पिछले साल के एरियर भुगतान पर जाता है। पीपुल्स एक्शन फॉर एंप्लॉयमेंट गारंटी प्लेटफॉर्म के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भी इस बकाया के करीब 12,494 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। वहीं मनरेगा योजना 2022 के तहत सक्रिय जॉब कार्ड वाले मजदूरों की संख्या भी करीब 10 करोड़ है।

पूंजीगत व्यय को 35.4 प्रतिशत बढ़ाया

सोमनाथन ने बताया कि केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत व्यय को 35.4 प्रतिशत बढ़ाकर चालू वर्ष में 5.54 लाख करोड़ रुपये से 2022-23 में 7.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि है।

उन्होंने कहा, “इस 2 लाख करोड़ रुपये में से केंद्र सरकार, राज्यों को हर जिले में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपये देगी। यह मनरेगा योजना 2022 बजट हमारी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना देगा।”

सरकार ने शुरू की नई पहल 

गौरतलब है कि, मनरेगा योजना 2022 में श्रमिकों की फर्जी हाजिरी पर लगाम लगाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत मनरेगा योजना 2022 में कार्यरत श्रमिकों की उपस्थिति ऑनलाइन एप के जरिए ली जाएगी।

नई व्यवस्था से फर्जी श्रमिकों को लेकर आ रही शिकायतों पर लगाम लग सकेगी साथ ही श्रमिकों का भुगतान भी समय पर होगा। अब फोटो युक्त ऑनलाइन माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था के चलते काफी हद तक इस मनरेगा योजना 2022 मे हो रहे फर्जीवाड़े पर रोक लग सकेगी।

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